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हंगामे के साथ शुरू हुई लाेकसभा में कायर्वाही
05 November 2014
नई दिल्ली। मानसून सत्र का गुरुवार को आखिरी दिन है। मगर, लोकसभा और राज्यसभा में विपक्ष का हंगामा जारी है। बुधवार को कांग्रेस ने ललित मोदी के मामले पर स्थगन प्रस्ताव पेश कर लोकसभा में चर्चा कराए जाने की मांग करते हुए जमकर हंगामा किया। वहीं, राज्यसभा में भी हंगामा हुआ। इसके चलते राज्यसभा की कार्यवाही दो बजे तक स्थगित कर दी गई। वहीं, हंगामें के बीच लोकसभा की कार्यवाही साढ़े बारह बजे फिर से शुरू हो गई है। लोकसभा स्पीकर सुमित्रा महाजन ने ललित मोदी के मामले में बहस के लिए ढाई घंटे का समय दिया है। इस बीच, ललित मोदी मामले में लोकसभा में बहस शुरू हो गई है। विपक्ष का कहना है कि बिना प्रधानमंत्री की मौजूदगी के चर्चा नहीं होगी। कांग्रेस के मल्िलकार्जुन खड़गे ने कहा कि स्थगन का प्रस्ताव पर विचार किया जाए। स्थगन प्रस्ताव पर चर्चा के लिए विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने खुद स्पीकर से कहा कि यह मेरे संबंध में है, लेकिन मैं आपसे अपील करती हूं कि इस प्रस्ताव को स्वीकार करे लें।

सुषमा ने कहा है कि स्थगन प्रस्ताव पर सरकार चर्चा के लिए तैयार हो गई हैं। विपक्ष 'ललितगेट', 'मोदीगेट' जो चाहे कहे, लेकिन चर्चा होने दे।

जेटली ने कहा कि हर कोई संसद की कार्यवाही चाहता है। समाज का हर वर्ग यह चाहता है। जो खुद को गरीबों का दोस्त बताते हैं, असल में वही उनके खिलाफ साजिश कर रहे हैं। कांग्रेस और उसे समर्थन करने वाले जिम्मेदार हैं। जो खुद को गरीबों का दोस्त बताते हैं, असल में वही उनके खिलाफ साजिश कर रहे हैं। कांग्रेस और उसे सपॉर्ट करने वाले जिम्मेदार हैं।

वहीं, वैंकेया नायडू ने हाथ जोड़कर विपक्ष से संसद चलने देने की अपील की। उनके मुताबिक, हम स्थगन प्रस्ताव पर चर्चा के लिए तैयार हैं।
लोकसभा स्पीकर सुमित्रा महाजन ने कहा कि यदि सब चाहते हैं तो प्रक्रिया के अनुसार मुझे स्थगन प्रस्ताव स्वीकार करना होगा। महाजन ने कहा कि सदन है यह इसका सम्मान करना सीखें। प्रक्रिया के तहत स्थगन प्रस्ताव प्रश्नकाल के बाद लाया जाता है।

कांग्रेस सांसदों ने सदन में 'मोदी तेरी तानाशाही नहीं चलेगी' और 'पूंजीपतियों की सरकार नहीं चलेगी' के नारे लगाए।

गौरतलब है कि विपक्ष के हंगामे के चलते जीएसटी जैसे अहम बिल अटके हुए हैं। संसद में मंगलवार को भी जोरदार हंगामा हुआ, जिसकी वजह से कोई कामकाज नहीं हो पाया। हंगामे के चलते राज्य सभा में जीएसटी बिल पर चर्चा नहीं हो पाई।

जीएसटी लागू नहीं हुआ तो होगा नौ लाख करोड़ रुपये का नुकसान

वस्तु व सेवा कर (जीएसटी) को लेकर कांग्रेस के विरोध से देश की अर्थव्यवस्था को एक साल में करीब नौ लाख करोड़ रुपये की कीमत चुकानी होगी। चीन समेत कई ग्लोबल अर्थव्यवस्थाओं की सुस्त रफ्तार के बाद भारत पर निगाह लगाए बैठे विदेशी निवेशकों से आने वाले संभावित निवेश का भी नुकसान उठाना पड़ सकता है।
जानकार मान रहे हैं कि जीएसटी लागू हो जाने से देश के सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) में डेढ़ से दो फीसद का इजाफा होगा। सरकार ने इस विधेयक को पहली अप्रैल, 2016 से लागू करने का लक्ष्य तय किया था। संसद में कांग्रेस के विरोध की वजह से पैदा हुए गतिरोध ने आजादी के बाद अप्रत्यक्ष कर के क्षेत्र में देश के सबसे बड़े सुधार को लागू होने से रोक दिया है। जीएसटी को लेकर बनी राज्यसभा की प्रवर समिति के सदस्य और निर्दलीय सांसद राजीव चंद्रशेखर मानते हैं 'जीडीपी में डेढ़ फीसद का योगदान भी माना जाए तो जीएसटी लागू नहीं होने से देश को 150 अरब डॉलर या करीब नौ लाख करोड़ का नुकसान उठाना पड़ेगा।'
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