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शहर विशेष
भोपाल
मासूम बेटे के सामने जेल में जहर खाने से महिला की मौत
12 August 2015
पति की हत्या के आरोप में सलाखों के पीछे पहुंची महिला की जहर खाने से मौत हो गई है। महिला ने जिस वक्त जहर खाया था, उस वक्त उसके साथ उसका डेढ़ साल मासूम बेटा भी था। महिला की मौत की न्यायिक जांच आदेश जारी कर दिए है। आदेश होने के साथ मामले की जांच भी शुरू हो गई है। मौत ने जेल प्रबंधन की कार्यप्रणाली पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है।
यह सनसनीखेज घटना भोपाल केंद्रीय जेल में सोमवार शाम की है। मामले में गांधी नगर पुलिस ने महिला की मौत के मामले में मर्ग कायम कर लिया है। मृतका की पहचान सरस्वती अहिरवार (28) के रूप में की गई है। वह सिद्धार्थ इनक्लेव हजरत निजामुद्दीन कालोनी में रहती थी।
महिला के पति विकास अहिरवार की एक जून 2015 को हत्या कर दी गई थी। जांच में यह पाया गया था कि हत्या में सरस्वती का हाथ है। पिपलानी पुलिस ने एक दिन पहले हत्या के आरोप में सरस्वती को गिरफ्तार किया था। गिरफ्तारी के बाद उसे अदालत में पेश किया गया था, जहां से जेल भेजने के आदेश दिए गए थे। जेल में दाखिल कराने से पहले महिला का मेडिकल परीक्षण कराया गया था। पुलिस का दावा है कि मेडिकल परीक्षण के बाद सरस्वती को शाम साढ़े चार बजे जेल में दाखिल करा दिया गया था। जेल प्रबंधन का कहना है कि महिला जेल के दरवाजे पर शाम 6.25 बजे पहुंची थी। जेल में दाखिल होने के दौरान महिला स्वस्थ थी। जेल में दाखिल होने के समय महिला जहर की पुडिय़ा अपने कपड़े में अंदर छुपाए हुए थी। जेल के अंदर जाने के बाद उसकी चेकिंग की जा रही थी, उसी दौरान उसने जहर की पुडिय़ा कर खा लिया था। तत्काल महिला को इलाज के लिए जेल अस्पताल में भर्ती कराया गया। डा. एनआर आजादा ने महिला का प्राथमिक उपचार किया और फिर हमीदिया अस्पताल के लिए रेफर कर दिया।  इलाज के दौरान रात करीब ग्यारह बजे हमीदिया अस्पताल में महिला की मौत हो गई।
मौत के बाद मामले की न्यायिक जांच के आदेश जारी कर दिए हैं। बताते हैैं कि न्यायाधीश राकेश कुमार पाटीदार ने मामले की जांच भी शुरू कर दी है। महिला की मौत ने जेल प्रशासन की कार्यप्रणाली पर कई सवाल खड़े कर दिए हैं।
बड़ा सवाल यह है कि जेल के अंदर जहर कैसे आया? जब महिला की जांच की जा रही थी, तब उसने अचानक जहर कैसे खा लिया? दाखिले से पहले जब बाहर जांच की जाती है, तो क्या उसके पास पुडिय़ा नहीं मिली थी? यदि जेल के अंदर पुडिय़ा मिली है, तो वहां तक कैसे पहुंची थी? ऐसे कई सवाल हैैं, जिनके जवाब जेल प्रबंधन को जांच के दौरान देना होगा।
सरस्वती ने दो बार की खुदकुशी की कोशिश 
जेल में मौत को गले लगाने से पहले सरस्वती ने दो बार खुदकुशी करने का प्रयास किया था। जेल जाने से पहले उसने दो बार फांसी लगाने का प्रयास किया था। तत्काल उसे इलाज के लिए अस्पताल में दाखिल कराया गया था, इसलिए वह बच गई थी। उसके पास से पुलिस को सुसाइड नोट भी मिला था, जिसमें उसने लिखा था कि वह पति के बिना नहीं रह सकती है।
बेटे को गोद में लेकर दाखिल हुई महिला
सरस्वती जिस वक्त जेल में दाखिल हुई थी, उस वक्त उसका डेढ़ साल का बेटा गोद में था। जेल में भी वह महिला के साथ में था। महिला की मौत के बाद बेटे को अस्पताल में रखा गया है। अदालत के निर्देश के बाद बच्चे को परिजनों को सौंप दिया जाएगा।
विकास के शरीर पर थे चोट के निशान
पुलिस शुरुआती जांच में विकास की मौत को आत्महत्या बात रही थी, लेकिन उसके शरीर पर चोट के ग्यारह निशान थे। पीएम रिपोर्ट और एफएसएल की जांच में आए तथ्यों के बाद पुलिस ने माना कि उसकी हत्या की
गई है।  जांच में पता चला कि विकास की मौत चोट लगने से हुई है। सख्ती से पूछताछ करने पर सरस्वती ने भी मारपीट कबूल ली थी।


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