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शहर विशेष
भोपाल
मास्टर प्लान में शामिल होंगे झीलों और नदियों के शरहद
12 August 2015
भोपाल, जल स्रोतों को संरक्षित करने, बढ़ते जल प्रदूषण को रोकने के लिए अब मास्टर प्लान में झीलों और नदियों के संरक्षण को भी शामिल किया जा रहा है। इसमें बड़े तालाब और नर्मदा सहित आठ झीलों और नदियों को शामिल किया गया है। बड़े तालाब के कैचमेंट एरिया के तीन सौ मीटर की परिधि में कोई भी निर्माण कार्य नहीं होंगे।
टाउन एंड कंट्री प्लानिंग (टीएनसीपी) मास्टर प्लान में ग्रीन वेस्ट लैंड का प्रावधान रखा जाता है उसी प्रकार से नदियों और झीलों के कैचमेंट एरिया में निर्धारित निर्माण कार्य नहीं होंगे। जो मकान या निर्माण कार्य पहले से हो चुके हैं, उनके विस्तार की अनुमति नहीं दी जाएगी। कैचमेंट एरिया में वृक्षारोपण तथा पार्क के रूप में विकसित किया जा सकेगा, लेकिन कृषि कार्य पूरी तरह से प्रतिबंधित किया गया है। टीएनसीपी ने झील संरक्षण तथा नदियों के संरक्षण में अंतर्राष्ट्रीय मानकों को शामिल किया है। इस मानक में एक हेक्टेयर से कम कैचमेंट एरिया वाली नदी को भी शामिल किया है, इस नदी के 9 मीटर तक की दूरी में कोई भी निर्माण कार्य की अनुमति नहीं दी जाएगी। जबकि एक हजार से अधिक और तीन हजार हेक्टेयर कैचमेंट वाली नदी के सौ मीटर तक की दूरी में कोई भी निर्माण कार्य नहीं किए जाएंगे। बड़े तालाब के कैचमेंट ऐरिया से तीन सौ मीटर की दूरी तक निर्माण कार्य की अनुमति नहीं दी जाएगी। इसी प्रकार से टीएनसीपी ने सभी नदियों और झीलों को 9 तरह से वर्गीकृत किया है। इन नदियों और झीलों में सीवेज का पानी, पेट्रोलियम रसायन सहित अन्य रसायनों को छोडऩे पर प्रतिबंध लगाया गया है। इन जलाशयों के पास बने प्राचीन तथा ऐतिहासिक इमारतों, धरोहरों के रख रखाव किए जाएंगे, लेकिन इनके साथ किसी प्रकार से छेड़छाड़ नहीं किया जाएगा। इस क्षेत्र का उपयोग आमोद-प्रमोद के लिए किया जा सकेगा।
भोपाल मास्टर प्लान आज भी अधूरा : प्रशासन की बेरूखी के चलते यह प्लान आज भी अधूरा है। मास्टर प्लान की सड़कों के लिए निर्माण और विकास एजेंसियों के पास पैसे ही नहीं है, जिससे दो हजार किलोमीटर सड़कें आज भी नहीं बन पाई हैं। वहीं बिल्डरों और नेताओं के दबाव में प्रशासन ने मास्टर प्लान की दो बड़ी सड़कें बदल डाली। वर्ष 1995 में भोपाल का मास्टर प्लान तैयार किया गया था, जो वर्ष 2005 तक के लिए बना था। इस मास्टर प्लान की कुछ छोटी-छोटी योजनाओं को छोड़ दिया जाए, तो बड़ी योजनाएं एक भी साकार नहीं हो पाई हैं। ढाई हजार किलोमीटर प्रस्तावित सड़कों में से महज ढाई सौ किलोमीटर सड़कें ही बन पाई हैं। एम्स के आस-पास की सबसे ज्यादा सड़कें बनाई गई है। सड़कें बनाने का काम बीडीए, सीपीए, लोक निर्माण विभाग और नगर निगम का था, लेकिन इन एजेंसियों के खजाने में सड़कों के निर्माण के लिए पैसे ही नहीं हैं। मास्टर प्लान में प्रस्तावित बाईपास को पांच से आठ किलोमीटर और आगे बढ़ा कर बनाया गया। यह सड़क मुबारकपुर से कोकता और कोकता से ग्यारह मील तक आठ किलोमीटर आगे बढ़ाकर बनाई गई है। मास्टर प्लान में भानपुर, भौंरी और भैंसापुरा में ट्रासपोर्ट नगर प्रस्तावित था, लेकिन यह ट्रांसपोर्ट नगर अभी तक नहीं बनाए गए। कोकता में ट्रांसपोर्ट नगर बनाने के कोई प्रस्ताव नहीं था, लेकिन वहां मैकेनिकल मार्केट और ट्रांसपोर्ट नगर बना दिया गया।


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